निर्दोष पशु करें पुकार, बंद करो ये मांसाहार!

Following lines shows my views towards non-vegetarianism. I dont intend to hurt anyone and these are just my personal views. I am sure a lot people can identify with my views and a lot of you wont. If you are sensitive, please stop reading here itself. Also, I dont intend to have any discussion/argument on this post so please refrain from doing the same.

सुखी जीवन तू चाहे, सुखी जीवन वे चाहें |
नर और जानवर की एक ही तो चाह है |
ऊन देते, दूध देते, तेरे लिए खेत जोतें,
बदले में उन्हें दी क्यूँ मौत की कराह है ?

तेरी बीवी तेरे बच्चे, जैसे लगते तुझे अच्छे|
कह न सकें भले मुंह से, उनकी भी यही चाह है|
उन्हें पालता है पोसता है, भोजन परोसता है,
इन पर तू बस दया कर, इसी में तेरी वाह है|

सब माने सब जाने, उनके दुखों को पहचाने,
उन्हें खाने के जो ये तेरे परिणाम हैं|
ये मनुष्यों के हैं नहीं, और पशुओं के भी नहीं,
निर्दयी और नृशंस हत्यारों के ये काम हैं!

माता अपनी संतान को चाहे खुद से भी ज्यादा,
चोट लगे पुत्र को, निकलती माता की भी जान है|
उस पशु की भी माता थी, माता थी और पिता थे,
जिस पशु का मांस खाकर, तूने बड़ाई अपनी शान है|

गाय को तू पूजता है, मांस उसका छोड़ता है,
बाकी पशुओं ने क्या, किया कोई गुनाह है ?
स्वार्थी है लालची तू, गाय में भी लाभ देखता है,
छोड़ा उसे क्यूंकि बिन गाय मुश्किल निर्वाह है!

एक दिन शाकाहारी, एक दिन मांसाहारी,
ढोंगी तेरे पाखंडो की, क्या कोई मिसाल है ?
है जो आज सही कल सही, आज गलत कल गलत,
पशु ने है जान खोई, भले हुआ हलाल है|

बेड काऊ मेड काऊ(Mad Cow) बर्ड फ्लू- Swine फ्लू,
शायद ये बीमारियाँ, मांसाहार का ही परिणाम हैं|
ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही, प्राकृतिक संपदा घट रही,
ऐसे इन कुकृत्यों का, शायद यही अंजाम है|

पीड़ा समझ पशुओं की, छोड़ दे तू मांसाहार,
सारे ये पशु-पक्षी, तुझसे कर रहे पुकार हैं|
पशु नहीं साग-सब्जी, समझोगे तुम ये कब जी ?
जिसने समझा, दया को धारा, वही तो दिलदार है|

पियूष

Talaash 2 – तलाश 2

ऐ दिलबर तू कौन है  कहाँ है, ज़रा सामने तो आ
कि मेरा दिल कहता है तू है कहीं और है बहुत हसीं, अब और ना तडपा |
तुझे ढूँढता हूँ हर मंज़र हर शख्स में, कि अब रहा नहीं जाता
शायद तुझे लुक्का-छिप्पी है पसंद, पर हमसे ये दर्द सहा नहीं जाता |

कभी सोचता हूँ तुम होगी बहुत खूबसूरत, जैसे जन्नत की परी
और कभी लगता है तुम होगी सबसे हसीं और सबसे प्यारी |
तुम जैसी भी हो जानेमन, गर मुझसे प्यार करो
तेरे लिए हर सितम उठा लूँगा, ये ऐतबार करो |

तेरे बिना ये ज़िन्दगी, कुछ अधूरी सी लगती है
कि अब तेरे बिन ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं, मजबूरी सी लगती है |
पढ़े होंगे तेरी तारीफ़ में, कसीदे कई आशिकों ने
कि मेरी ये चंद पंक्तियाँ गैर ज़रूरी लगती हैं |

— पियूष |

Uttam Kshama SMS (Dashlakshan Parv SMS)

Jaane me anjaane me,
man ke vachan sunane me,
agar tuta ho aapka maan,
To kshamavani ke parv par de dijiye,
hame kshama ka daan
UTTAM KSHAMA

Chhota sa sansaar,
Galtiyan apaar,
aapke paas hai Kshama ka adhikaar,
Kar lijiye nivedan sweekar,
“UTTAM KSHAMA”

2 shabd kshama ke jeeva ko Khushal karte hain,
Takrav door hota hai, Khushiya hazaar dete hain.
Khush rahe khushiya bate mahan use kehte hain.
Antarman se kshamayaachna.

eK1 Din K 24Ghante eK1 Ghante K 60Minute eK1 Minut K 60Sec eK Hazar Lamhe Hazar Lamhe Me 1 Hi AAWAZ
UTTAM KSHAMA

bhool hona prakrati hai, maan lena sanskriti hai, isliya ki gai galti ke liye hame kshama kare,uttam kshama

Suraj jaise andhera dur kare, pani jese pyas dur
kare, waise hi paryushan kshamawani parv par aap hamari sari galtiyon aur
bhul-chuk ko kshama kare. UTTAM KSHAMA

Forgivness is d only way 2 break d cycle of blame & pain in a relationship.
It does nt settle all questns of blame & justice &  fairness,Bt it does allow relationship 2 start over.As they say,we differ frm animals coz of ourcapacity 2 repent,& 2 forgive.
So plz accept my deep heart apologies 4 my mistakes
UTTAM KSHAMA

Is choti si zindagi me, humari aap se choti si mulaqat mein, kabhi bhi, kahi bhi hamari wajah se aapki chand si muskaan chali gayi ho to hume shama kare, UTTAM KSHAMA

mann vachan kaya se jaante hue ya ajante hue dil dukhaya ho to aapse UTTAM KSHAMA

Jeevan Yatra me Chalte Chalte,Swarth , moh , agyantawah…Hui bhulo k leye…Sache swatch riday se…Shamayachna karte hue…Hum apke sneh metri bhav ki kamna karte hai. UTTAM KSHAMA

KUCH GALTIYA JANTE,KUCH AJANTE,KUCH KADVI VANISE KISI KARAN APKA DIL DUKHAYA HO TO MAN VACHAN KAYASE UTTAM KSHAMA

“Kshama Veerasya Bhushanam” Vigat Vrsha MeJane AnjaneHamari Koi Bhul SeAapke Komal Dil KoThes Lagi HoToMansaVachaKarmana Se UTTAM KSHAMA

365 Din, 12 Mahina, 52 Saptah, 8760 ghanta, 525600 minut, 31536000 Secondme hamare taraf se koi jane anjane me galti hui ho ya dil dukhaya ho to barambar hath jodkar UTTAM KSHAMA

“Bhul”Se Agar”Bhul”Hogayi To”Bhul”Samazkar”Bhul”Jana, Magar”Bhul na”Sirf”Bhul”Ko,”Bhul”Se Hamko Mgat”Bhul”Jana. UTTAM KSHAMA

Aapke sukh ki hardum prabhu se karte kamana,aanjane me teer chal jate hai zindagi ka karte samna,Aap ka dil dukhayen aisi nhi thi hamari bhawana,fir b bhol vash hui galti k liye dono hath jodkar karte hai kshama Yaachna

Surya jaise tejsvi ,Chandra jaise shital ,Gagan jaise vishal Nadi jaise nirmal Aapke parivrko UTTAM KSHAMA

We take Few Seconds to hurt someone but sometimes we take years to say SORRY.This msg is to every1 whom i’ve Hurt Knowingly or unknowingly. UTTAM KSHAMA

Anjane mein, anchahe bhi, bhool kabhi bhi ho sakti hai.
Jeevan ke un kroor palo mein, buddhi bhi to so sakti hai.
Jeevan ke un kroor palo ki, bhool hamari maaf karein.
Kshma Parv hai, Kshma daan dein, Kaalush man ka saaf karein.
“Parasparopagraho Jeevaanaam”

Forgivness is d only way 2 break d cycle of blame & pain in a relationship.
It does nt settle all questns of blame & justice & fairness,Bt it does allow relationship 2 start over.As they say,we differ frm animals coz of ourcapacity 2 repent,& 2 forgive.
So plz accept my deep heart apologies 4 my mistakes
UTTAM KSHAMA

2 shabd kshama ke jeeva ko Khushal karte hain,
Takrav door hota hai, Khushiya hazaar dete hain.
Khush rahe khushiya bate mahan use kehte hain.
Antarman se kshamayaachna.

Dashlakshan Parv SMS

Mahavir Ke vachan
Parshv ka Jivan
Rishabh ka tap
Nem ki charya
Kumarpal ki aarti
Chandanbala ke aansu
Trishla ke sapne aur
kalpsutra ke panne
Itihas k garv
Happy Paryushan Parv

Wo subah ka bhaktambar
Wo shaam ka Pratikraman
Wo bhavan me Santo ka pravachan
Wo ratri bhojan ka tyaag
Wo jaino ki dhoom
Mubarak ko Paryushan Parv

Sanyam saurabh saadhna jinko kare pranam,
Tyaag tapasya teerth ka “Vidyasagar” hai naam.
Sharad purnima par aacharya shri ko hum sabka vandan

Kar jate hai shararat kyuki thode shaitan hai hum,
kar dete hai galti kyuki insaan hai hum.
Na Lagana humari bato ko kabhi dil se,
apko to pata hai kitne nadan hai hum.
UTTAM KSHAMA 

यह ज़िन्दगी का प्रवास है,
कम समय में जीने का प्रयास है।
लेने जैसी चीज़ है,
तो प्रेम की मिठास है।
और छोड़ने जैसी चीज़ है,
तो मन की कडवास है।।
उत्तम क्षमा

उत्तमक्षमा:-
मन से वचन से काय से,
कृत , कारित , अनुमोद से।
आगत, अनागत,वर्तमान ;
में किये अपराध जो।।
उनके समापन के लिये,
हृदय से मैं क्षमा मांगूं।
करके क्षमा धो दीजिये, कालुष्य कृपा कीजिये।।
जानकर अनजान होकर, संचित किये साधन सभी।
इस हेतु बाधित किये मैंने,
जीव सारे जगत के।।
परिमित करूँ वा दान कर ,
धो लूँ सभी कालुष्य वे।
एकत्र जो भी किये थे,
साधन सभी मैंने कभी।।
मान माया क्रोध लोभ,
हास्य आदि कषा जो।
पोषण किया उन सभी का , तोषक उन्हीं को जानकर ।।
ये अहितकर हैँ निपट जो,
हितकर उन्हीं को मानकर।
भ्रम टूटने से जोड़ कर,
माँगूं क्षमा यह जानकर।।

कर जाते है शरारत क्योंकि थोड़े शैतान है हम,
कर देते है गलती क्योंकि इन्सान है हम |
ना लगाना हमारी बातों को दिल से,
आपको तो पता है कितने नादान है हम |

क्षमा में शीतलता निहित है,
आपके ह्रदय-मेघ में समाहित
क्षमा रूपी अमृत वर्षा से
हमें अभिसंचित कर कृतज्ञ करें।
मन, वचन, कर्म से
करबद्ध क्षमाप्रार्थी !!!
🙏🏼🙏🏼🙏🏼

कुछ त्रुटियाँ हम से हो जाती हैं
कुछ त्रुटियाँ हम कर जाते हैं,

कुछ त्रुटियाँ हमें याद रहती हैं,
कुछ त्रुटियाँ हम भूल जाते हैं।
अतः क्षमापना पर्व पर मैं समस्त जानी अनजानी त्रुटियों के लिए क्षमायाचना करता हूं ।

💠 💠 उत्तम क्षमा 💠💠

🙏क्षमा याचना🙏

🎊🎊कभी अनजाने में तो कभी जानकर
कभी मान में तो कभी शान में
कभी हंसी में तो कभी दुखी में
कभी सामने तो कभी फ़ोन पर
कभी Chat में तो कभी Mail पर या

१. कभी रात को लेट मेसेज भेजा हो
२. कभी मेसेज दुबारा भेजा हो
३. कभी कसम वाले मेसेज भेजे हो
४. कभी बिना सत्यता जांचे मेसेज भेजा हो
५. कभी मेसेज के माध्यम से किसी का दिल दुखाया हो
६. ज्यादा मेसेज भेज के परेशान किया हो
७. अच्छा मेसेज अपने पास रखा हो
८. ग्रुप मे रह कर मेसेज ना किया हो
९. मेसेज पढ कर उतर ना दिया हो
१०. दुसरे का नाम हटाकर खुद का नाम से मेसेज किया हो तो।

जाने कितनी ही बार आपका हृदय
मेरे द्वारा दुखित हुआ होगा

👏👏अतः पर्वराज पर्युषण के इस पवन अवसर पर हम आपसे अपने सभी अपराधों हेतु क्षमा याचना करते हैं, कृपया हमे क्षमा प्रदान कर कृतार्थ करें👏👏

🙏🙏उत्तम क्षमा🙏🙏
🙏Uttam Kshama🙏

इस जीवन में ऐसे कई पल आये होंगे जब मेरे या मेरे परिवार के द्वारा किये गए कार्यों के प्रति या कहे गए शब्दों के प्रति आपके मन में क्षोभ उत्पन्न हुआ हो तथा हम आपके क्रोध के निमित्त के रूप में आपके समक्ष उपस्थित हुए हों
…….दसलक्षण महापर्व के समापन के इस अवसर पर मै अपने एवं अपने पुरे परिवार की और से आप सबसे ऐसे प्रत्येक क्षणों हेतु क्षमाप्रार्थी हूँ…
उत्तम क्षमा 


JAI JINENDRA,
PIYUSH JAIN

समय का सामना (Samay ka Saamnaa)

Whether its reaching railways station or submitting the assignments or be it anything i try to do it at the last moment… making it a risky affair.. following lines are written wondering why do i do the same..

जीवन की आपाधापी में,
हर दिन की कूदा-फ़ांदी में ।
जीवन जीने को समय नहीं,
इस समय की चलती आंधी में ।

रह रह कर क्यूं चंचल मन में,
कुछ यूं सुरूर सा चढता है ?
सीमा ये समय की परखने को,
क्यूं अक्सर आगे बढता है ?

पता है रुकता समय नहीं,
भले राजा चाहे या ही मुनी ।
पर जब जब आये ऐसे क्षण,
मैनें क्यूं है मन की सुनी ?

यूं तो पा सकता था मैं,
समय से कुछ पहले भी ।
और निश्चेत जा सकता था में,
अन्तेम क्षण के पहले ही ।

अन्तेम क्षण में जाने को,
और अन्तेम क्षण में पाने को ।
क्या मिला मुझे कुछ और नहीं,
अभेमान का विषय बनाने को ?

सीमाओं से टक्कर लेकर,
क्या समय जीतना चाहता हूं ?
या बस मित्रों के समक्ष,
शेखी बघारना चाहता हूं ?

या आदत हो गयी मुझको,
हर कार्य में बाधाओं की ?
और पाया लगे ना पाया सा,
गर पाया बिन बाधा के ?

पियूष !

PS : The example of submitting assignment may not be very correct in this context bcoz we submit it late as we have to wait for the original copy to get made 😛
PS2: Sometime back saw a Telugu flick “Kick”… wondering does it give a “kick” to do things at last moment & making it risky ?

Piyush

fir wahi zindagi – फ़िर वही ज़िन्दगी

….while cleaning my flat came across few notebooks which i preserved till now, went through them and found this poem 🙂 btw donno why i wrote this 😀 bcoz nothing mentioned below actually happened..pure imagination 😀 btw i found one more which is half completed will finish it soon !

कर के वादे कई,
वो मुकर जाते हैं।
फ़िर याद आती हैं क्यूं,
उनकी वो बातें हैं?

कहती वो क्यूं थी,
चाहती मैं हूं तुम्हे।
याद आते हैं क्यूं,
बीते वो लम्हे?

चाहता मैं हूं तुम्हे,
ना रहूं बिन तेरे।
फ़िर क्यूं तोडे तूने,
प्यारे अरमान मेरे?

ना कभी भी मैनें,
तुझको गम है दिया।
तुझको चाहा मैनें,
बस तुझी को जिया।

गर वो भूले हमें,
और वो वादे किये।
जी लेंगे बिन उनके,
जैसे अब तक जिये!

जय जिनेन्द्र !
पियूष

Talaash – तलाश

कभी किसी की तलाश में,
कभी किसी की आस में ।
हर पल तडपता रहा,
इस ज़िन्दगी उदास में ।

उसे देखता तो सोचता,
वो है बनी मेरे लिये ।
चाहे यही वो, सोचकर,
जलते रहे दिल में दिये ।

दिन गुज़रे, महीने गुज़रे,
और गुज़रे चारों साल ।
पर कह ना सका उसे देखकर,
अपने दिल का हाल ।

कुछ दुख हुआ, पर फ़िर लगा,
जो हुआ, शायद सही ।
उसे भूलकर आगे बढा,
पर हसरतें फिर भी रहीं ।

अब फ़िर किसी को ढूंढता हूं,
अब फिर किसी की है तलाश ।
कोई होगा तो कहीं,
इस दिल को है अब भी आस !

अब फ़िर किसी की तलाश में,
अब फ़िर किसी की आस में ।
अब फ़िर तडपता है ये दिल,
इस ज़िन्दगी उदास में !

जय जिनेन्द्र,
पियूष !

Rishtey – रिश्ते

कोशिश करता हूं,
कि रिश्तों को बनाकर चलूं ।
नये मज़बूत रिश्ते बनाऊं,
जब नये लोगों से मिलूं ।

रिश्ते बहुत ज़रूरी हैं,
जीवन के हर पल में ।
खुशियों को बांटने में,
दुखों को हल्का करने में ।

जब एक रिश्ता बनाता हूं,
तो सोचता हूं,
रिश्ता बनता है विश्वास पर,
सम्मान पर समर्पण पर।

आशा नहीं करता अपमान की,
स्वार्थ की मायाचारी की ।
पर जब आते हैं ऐसे क्षण,
रिश्ता लगता है बीमारी सी ।

जीवन ज्यादा तो नहीं देखा,
और ना ही ज्यादा रिश्ते ।
पर देखा है कई लोगों को,
इन रिश्तों के पाटों में पिसते ।

उन लोगों में शामिल रहा हूं,
मैं भी अक्सर, कई बार ।
कभी हुई गल्तियां मुझसे,
तो हुई गल्तियां कभी उस पार ।

कुछ रिश्ते टूट गये,
कुछ में आ गई दरार ।
पर दोनों ही स्थितियों में,
खोया कुछ दिल का करार ।

जानता हूं रिश्ते जरूरी हैं,
रिश्तों से जीवन सजता है ।
पर फिर टूट न जाएं सोचकर,
रिश्ते बनाने से डर लगता है !

पर फिर टूट न जाएं सोचकर, रिश्ते बनाने से डर लगता है !

जय जिनेन्द्र,
पियूष