Archives

अष्ट कर्म, त्यागेंगे हम !

Wrote this poem for kids of Jain Pathshala in US to help them learn about Karm.

———————
हमको सिखाता है ये जैन धरम,
सुखी होना है तो छोडो आठों करम ।
कर्म हमें भटकाते हैं संसार में,
जन्म-मरण के चक्कर असार में ।

 

पहला करम कहलाता ज्ञानावर्णी,
दूसरा करम कहलाता दर्शनावर्णी।
पहला ज्ञान, दूसरा दर्शन को ढके,
ऐसे कर्मों को क्यों और हम रखें।

 

मोहनीय है भैया तीसरा करम,
पर में अपनेपन का कराता भरम।
चौथा करम कहलाता अंतराय,
सुखी होने में ये बाधा लाये।

 

आयु है भैया पाँचवा करम,
बताता कितना कहाँ जियेंगे हम।
छटवा करम कहलाता नाम,
शरीर की रचना इसका काम ।

 

गोत्र है भैया सातवा करम,
उच्च-नीच गोत्र देना कार्य परम ।
आठवा करम कहलाता वेदनीय,
सुखी करता कभी करता दयनीय।

 

पहले चार हैं घातिया करम,
स्वाभाव का घात करने में सक्षम।
अगले चार कहलाते अघातिया,
देते शरीर, संयोग और साथिया

 

घातिया कर्मों का करके अंत,
बन जाऊँ शीघ्र मैं अरिहंत ।
आठों कर्मों का करके नाश,
बन जाऊं सिद्ध शुद्धात्म प्रकाश ।

जय जिनेन्द्र !
पियूष

Advertisements

सफ़लता

सफ़लता क्या है ?

क्या सफ़लता है,
बेहिसाब पैसे कमाना,
अथाह सम्पत्ती जमा करना,
ढेरों नौकर चाकर होना,
लोगों पर रुतबा होना ??

या सफ़लता है,
निश्चिंत जीवन के अनुकूल साधन होना,
लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना,
उनका सम्मान पाना,
सन्तुष्टि होना,
मानवता को कायम रखना,
और परिवार में harmony होना?

मुझे तो दूसरी ठीक लगती है ।

जय जिनेन्द्र !
पियूष !

क्या सच में हम स्वाधीन हैं ?

भाषा सीखें हम गोरों की,
सेवा करें हम औरों की ।
भ्रष्टाचार में हम प्रवीन हैं,
क्या सच में हम स्वाधीन हैं ?

जीवन में मूल्य नहीं शेष,
बढ रहा आज है द्वेष क्लेश ।
निज सेवा में ही लीन हैं.
क्या सच में हम स्वाधीन हैं ?

पश्चिम को है सब्की दौड,
नीचे गिरने की मची होड ।
शाषक स्वयं पराधीन है,
क्या सच में हम स्वाधीन हैं ?

लगता अच्छा अब पिज़्ज़ा कोक,
माना नहीं कोई रोक टोक ।
पर हुए राष्ट्र श्रमिक श्रमहीन हैं,
क्या सच में हम स्वाधीन हैं ?

सन्स्कार गर रख सके विशेष,
हो राष्ट्र प्रगति बस एक उद्देश्य ।
हो अपनी भाषा और अपना भेष,
ना कोई अवगुण यदि रहे शेष,
बस भक्ती प्रेम में तल्लीन हों,
तब सच में हम स्वाधीन हों ।

तब सच में हम स्वाधीन हों ।

नमस्ते,
पियूष जैन

Powered by ScribeFire.

उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

Best viewed in Internet Explorer.

थकने का अभी समय नहीं, अभी काम बहुत करना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

रुकने को अभी शरण नहीं, तुझे जीवन पर्वत चढना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

बुझने का अभी विकल्प नहीं, बन ग्यान ज्योती जलना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

सोने को अभी जगह नहीं, तुझे जागृत विश्व करना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

मरने का अभी प्रश्न नहीं, जीवन यह सफ़ल करना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

कष्टों की परवाह नहीं, कर्तव्य पथ पर चलना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

सुगम ये तेरी राह नहीं, कान्टों पर से चलना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

क्षणिक सुख की चाह नहीं, तुझे प्राप्त मोक्ष करना है ।
उठ, आगे बढ, तुझे बहुत अभी चलना है !

नमस्ते,
पियूष

In English:

Thakne ka abhi samay nahin, abhi kaam bahut karna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Rukne ko abhi sharaN nahin, tujhe jeevan parvat chaDna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Bujhne ka abhi vikalp nahin, ban gyaan jyoti jalna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Sone ko abhi jagah nahin, tujhe jaagrut vishwa karna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Marne ka abhi prashn nahin, jeevan yah safal karna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Kashton ki parvaah nahin, kartavya path par chalna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Sugam ye teri raah nahin, kaanton par se chalna hai,
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Kshanik sukh ki chaah nahin, tujhe praapt moksha karna hai.
Uth, aage badh, tujhe bahut abhi chalna hai.

Adios ,
Piyush

Powered by ScribeFire.

Realization

Dont you sometime feel that whatever we are doing here is not very much what we wish or what our parents expect from us..?? I know most of us do not, but even then i am sure everyone of us must have thought atleast once about it…when i came across this thought once again (which generally come with xamz!)these lines i have written at such a moment..

Disclaimer: These lines are not a result of my midsem performance :D,i wrote them before mids, but was busy with preparations..

I feel guilty,
when my Mother asks,
‘How are you studying?’
& i say ‘fine Mom’ !!

She asks before the exams,
‘how is your preparation?’
& again i lie..
‘Its good Mom’ !!

She is worried about me,
so she again calls after the exam,
& again i could only say..
‘it went fine Mom’..

How can i say to her,
I studied only a day before,
how can i explain to her,
over lecture i preferred sleep more..

I didnt make any notes,
but chatted with my friends!
i never opened course book,
but wasted time in browsing net..

I copied the assignments,
without giving a second thought.
I ended up sleeping,
when finally time to study i got..

How can i lie to her,
who has enormous faith in me.
who never cared for herself,
but did everything for me..

I was never like this,
I was conscious of my responsibilities,
I always tried to do my best,
always concerned about studies..

Earlier she used to say,
‘Please go to sleep its very late..’
& i used to reply,
‘i am going Mom plz wait..’!!

Then why is this transformation?
why lack of motivation?
Future is still not certain,
then why is this hesitation?

Mom You have always been my strength,
you suffered happily for my gain..
Give me power & wake me up,
I want to be your old son again !!

Give me power & wake me up, I want to be your old son again !!