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कभी मैं भी बदलूंगा !

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कभी मैं भी बदलूंगा !

हर दिन वही  कहानी,
आज तो मैं ऐसा करूँगा,
अब से वैसा नहीं करूँगा,
पर शाम आते-आते,
हम हैं अक्सर खुद को वहीँ पाते।
 
क्यूँ मैं गलती दोहराता हूँ?
क्यूँ फिर उसी रास्ते जाता हूँ?
यह सोच सोच होकर परेशां,
फिर उलटी करवट ले सो जाता हूँ!
 
एक बार फिर नई सुबह आती,
विश्वास पहले से कम पर उम्मीद बढ़ जाती,
कल भले न सही आज कुछ अलग करूँगा,
मन में अब भी है विश्वास, कभी मैं भी बदलूंगा!
 
-पियूष