Archive | July 2014

प्रिय दादाजी, मैंने सीखा तुमसे…

Nana Ji

प्रिय दादाजी,

मैंने सीखा तुमसे, हर पल हँसते रहना।
चाहे कैसी हो कठिनाई हर पल चलते रहना।
मैंने सीखा तुमसे, नित सम्बन्धों को बनाना।
न सिर्फ उन्हें बनाना पर सम्बन्धों को चलाना।

मैंने सीखा तुमसे, सब से मृदुभाषी रहना।
चाहे गरीब या अमीर सब का एक ही कहना।
मैंने सीखा तुमसे, निस्वार्थता का पाठ।
तेरे वो अंदाज और सबसे निराले ठाठ।

मैंने सीखा तुमसे, दिल से बच्चा रहना।
ताली बजकर ख़ुशी में बच्चों सा चहकना।
मैंने सीखा तुमसे, परोपकार का ज्ञान।
खुद रहकर कमियों में कैसे करना दान।

मैंने सीखा तुमसे, सच्चा धर्म शिखर।
कैसे पढना णमोकार मन्त्र मृत्यु शय्या पर।
मैंने सीखा तुमसे, कैसे हों कर्मठ।
कैसे रहें सरल और दूर करें सब हठ।

मैंने सीखा तुमसे, संघर्ष सहर्ष ही करना।
संघर्ष और सफलता में आचरण समान ही करना।
मैंने सीखा तुमसे, जीवन में स्वाद का महत्त्व।
होना कभी थोडा गुस्सा, रखना हमेशा पोती-पोतों पर ममत्व।

मैंने सीखा तुमसे, उम्र को सिर्फ अंक जताना।
चाहे हो पचास या पिच्यासी ऊर्जा वही फैलाना।
मैंने सीखा तुमसे, जीवन सच में जीना।
याद आओगे तुम हर क्षण जीवन अधूरा सा है तुम्हारे बिना।

मैंने सीखा सब कुछ तुमसे…कुछ नहीं मैं तुम्हारे बिना।

-पियूष 

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