Talaash 2 – तलाश 2

ऐ दिलबर तू कौन है  कहाँ है, ज़रा सामने तो आ
कि मेरा दिल कहता है तू है कहीं और है बहुत हसीं, अब और ना तडपा |
तुझे ढूँढता हूँ हर मंज़र हर शख्स में, कि अब रहा नहीं जाता
शायद तुझे लुक्का-छिप्पी है पसंद, पर हमसे ये दर्द सहा नहीं जाता |

कभी सोचता हूँ तुम होगी बहुत खूबसूरत, जैसे जन्नत की परी
और कभी लगता है तुम होगी सबसे हसीं और सबसे प्यारी |
तुम जैसी भी हो जानेमन, गर मुझसे प्यार करो
तेरे लिए हर सितम उठा लूँगा, ये ऐतबार करो |

तेरे बिना ये ज़िन्दगी, कुछ अधूरी सी लगती है
कि अब तेरे बिन ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं, मजबूरी सी लगती है |
पढ़े होंगे तेरी तारीफ़ में, कसीदे कई आशिकों ने
कि मेरी ये चंद पंक्तियाँ गैर ज़रूरी लगती हैं |

— पियूष |

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