Talaash – तलाश

कभी किसी की तलाश में,
कभी किसी की आस में ।
हर पल तडपता रहा,
इस ज़िन्दगी उदास में ।

उसे देखता तो सोचता,
वो है बनी मेरे लिये ।
चाहे यही वो, सोचकर,
जलते रहे दिल में दिये ।

दिन गुज़रे, महीने गुज़रे,
और गुज़रे चारों साल ।
पर कह ना सका उसे देखकर,
अपने दिल का हाल ।

कुछ दुख हुआ, पर फ़िर लगा,
जो हुआ, शायद सही ।
उसे भूलकर आगे बढा,
पर हसरतें फिर भी रहीं ।

अब फ़िर किसी को ढूंढता हूं,
अब फिर किसी की है तलाश ।
कोई होगा तो कहीं,
इस दिल को है अब भी आस !

अब फ़िर किसी की तलाश में,
अब फ़िर किसी की आस में ।
अब फ़िर तडपता है ये दिल,
इस ज़िन्दगी उदास में !

जय जिनेन्द्र,
पियूष !

4 thoughts on “Talaash – तलाश

  1. दुख भरे दिल की आवाज़ … ह्म्म्म पुराने घाव हरे हो गए …🙂

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