Archive | February 2010

Talaash – तलाश

कभी किसी की तलाश में,
कभी किसी की आस में ।
हर पल तडपता रहा,
इस ज़िन्दगी उदास में ।

उसे देखता तो सोचता,
वो है बनी मेरे लिये ।
चाहे यही वो, सोचकर,
जलते रहे दिल में दिये ।

दिन गुज़रे, महीने गुज़रे,
और गुज़रे चारों साल ।
पर कह ना सका उसे देखकर,
अपने दिल का हाल ।

कुछ दुख हुआ, पर फ़िर लगा,
जो हुआ, शायद सही ।
उसे भूलकर आगे बढा,
पर हसरतें फिर भी रहीं ।

अब फ़िर किसी को ढूंढता हूं,
अब फिर किसी की है तलाश ।
कोई होगा तो कहीं,
इस दिल को है अब भी आस !

अब फ़िर किसी की तलाश में,
अब फ़िर किसी की आस में ।
अब फ़िर तडपता है ये दिल,
इस ज़िन्दगी उदास में !

जय जिनेन्द्र,
पियूष !

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Rishtey – रिश्ते

कोशिश करता हूं,
कि रिश्तों को बनाकर चलूं ।
नये मज़बूत रिश्ते बनाऊं,
जब नये लोगों से मिलूं ।

रिश्ते बहुत ज़रूरी हैं,
जीवन के हर पल में ।
खुशियों को बांटने में,
दुखों को हल्का करने में ।

जब एक रिश्ता बनाता हूं,
तो सोचता हूं,
रिश्ता बनता है विश्वास पर,
सम्मान पर समर्पण पर।

आशा नहीं करता अपमान की,
स्वार्थ की मायाचारी की ।
पर जब आते हैं ऐसे क्षण,
रिश्ता लगता है बीमारी सी ।

जीवन ज्यादा तो नहीं देखा,
और ना ही ज्यादा रिश्ते ।
पर देखा है कई लोगों को,
इन रिश्तों के पाटों में पिसते ।

उन लोगों में शामिल रहा हूं,
मैं भी अक्सर, कई बार ।
कभी हुई गल्तियां मुझसे,
तो हुई गल्तियां कभी उस पार ।

कुछ रिश्ते टूट गये,
कुछ में आ गई दरार ।
पर दोनों ही स्थितियों में,
खोया कुछ दिल का करार ।

जानता हूं रिश्ते जरूरी हैं,
रिश्तों से जीवन सजता है ।
पर फिर टूट न जाएं सोचकर,
रिश्ते बनाने से डर लगता है !

पर फिर टूट न जाएं सोचकर, रिश्ते बनाने से डर लगता है !

जय जिनेन्द्र,
पियूष

सफ़लता

सफ़लता क्या है ?

क्या सफ़लता है,
बेहिसाब पैसे कमाना,
अथाह सम्पत्ती जमा करना,
ढेरों नौकर चाकर होना,
लोगों पर रुतबा होना ??

या सफ़लता है,
निश्चिंत जीवन के अनुकूल साधन होना,
लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना,
उनका सम्मान पाना,
सन्तुष्टि होना,
मानवता को कायम रखना,
और परिवार में harmony होना?

मुझे तो दूसरी ठीक लगती है ।

जय जिनेन्द्र !
पियूष !